
ऑस्ट्रेलिया के ब्रैड हॉज आई.पी.एल के अभी तक के सफ़र के बारे मे बताते हुए...
Thursday, May 29, 2008
ब्रैड हॉज और आई.पी.एल...
ऑस्ट्रेलिया के मध्य-क्रम का ये बल्लेबाज़ जो चर्चा मे आया था भारत के खिलाफ़ विक्टोरिया की ओर से खेलते हुए शानदार दोहरा शतक मारने के बाद। और इसी आधार पर ब्रैड हॉज का चयन ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम मे हुआ। अभी ब्रैड भारत मे चल रही आई.पी.एल मे कोलकाता टीम का हिस्सा हैं, हमारे रिपोर्टर अक्शोभ गिरिधरदास ने उनसे बात की...
ब्रैड, अभी तक का आई.पी.एल का सफ़र कैसा रहा है?
बहुत मज़ेदार, ये एक नया रूप है क्रिकेट का। जिसमे रोमांच है, ऐक्शन है, मज़ा है कुल मिलाकर ये एक दिलचस्प प्रतियोगिता है। और दर्शक भी इसका भरपूर मज़ा ले रहें हैं।
अगर हम टवेन्टी20 की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया मे ये काफ़ी लोकप्रिये हो चुका है, आप इसे वहाँ से कितना अलग मानते हैं?
मेरे ख्याल से कोई फ़र्क नही है, सिर्फ़ परिस्थितियाँ अलग अलग हैं, विकेट अलग है, मौसम अलग है। क्रिकेट के हिसाब से बिल्कुल ही एक समान है। वही रोमांच, वही ऐक्शन।
ब्रैड, कोलकाता ने प्रतियोगिता कि शुरूआत बड़े ही धमाकेदार अंदाज़ मे की थी, पर उसके बाद लय भटक गये। क्या आपको लगता है कि रिकि पौंटिन्ग और मैकुलम के जाने से फ़र्क पड़ा है?
असर तो ज़रूर पड़ता है, मैकुलम ने ज़बर्दस्त शुरूआत की थी, रिकि भी बहुत ही बड़े खिलाड़ी हैं। और हर टीम चाहती है कि उसका संतुलन बना रहे पर अंतराष्ट्रीय सेवा के लिये खिलाड़ियों को जाना ही पड़ता है, हम अभी एक युनीट की तरह खेलना चाह रहें हैं और 1-2 जीतों से टीम वापसी कर लेगी।
शोएब अख्तर और उमर गुल के आ जाने से टीम के मनोबल पर कितना फ़र्क पड़ेगा?
जी हाँ, शोएब से तेज़ तो कोई गेंदबाज़ है ही नही, उमर गुल भी बहुत अच्छे गेंदबाज़ हैं। इसके अलावा हमारे पास इशान्त शर्मा और अजीत अगरकर भी हैं, और युवा अशोक डिन्डा भी बेहतरीन फ़ॉर्म मे हैं। तो ऐसे मे हमारी गेंदबाज़ी काफ़ी मज़बूत दिख रही है। जिससे टीम के संतुलन मे ज़रूर फ़ायदा होगा।
आपने कई अंतराष्ट्रीय मैच खेलें हैं, और अब आई.पी.एल भी खेल रहें हैं। कितना अलग महसूस कर रहें हैं आप?
ये बिल्कुल ही अलग और दिलचस्प बात है, क्योंकि आमतौर पर आप इनके खिलाफ़ खेलते हैं और यहाँ पर वो आपके के टीम् मे ही हैं। जैसे शोएब या सौरव ये सब आपके खिलाफ़ रहते हैं पर यहाँ ये आपके ही टीम मे हैं। बहुत मज़ा आ रहा है इसमे।
- जैसा अक्शोभ गिरिधरदास को कहा गया।
